नेपाल में बाढ़ पूर्व की सारी योजनाओं पर काम रुका, बिहार की परेशानी बढ़ी

नेपाल में बाढ़ पूर्व की योजनाओं पर काम ठप हो गया है। इससे बिहार की परेशानी बढ़ गयी है। नेपाल में ये कार्य उत्तर बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए हो रहे थे। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरों का सीधा असर इन कार्यों पर भी पड़ा है। नेपाल में चल रहे सारे कार्य अचानक बंद हो गए हैं। इन परियोजनाओं पर काम करने वाले कामगार और इंजीनियर लौट चुके हैं। इन कार्यों को 15 मई के पहले हर हाल में पूरा हो जाना था। हालांकि जल संसाधन विभाग को विश्वास है कि मानसून आने के पहले सारे कार्य अवश्य पूरे हो जाएंगे।


नेपाल प्रक्षेत्र में 21 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन पर 71 करोड़ की राशि खर्च होनी है। ये सारे कार्य नेपाल से निकलने वाली नदियों के पानी के फैलाव को रोकने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा नेपाल के अंदर नदियों के तटबंधों को और मजबूत बनाने और उंचा करने की योजना भी चल रही थी। ये सारे कार्य दो चरणों में हो रहे थे। पहली योजना वर्ष 2019-20 की थी, जिसमें 40 करोड़ की विभिन्न योजनाओं पर काम हो रहा है। दूसरी योजना वर्ष 2020-21 के लिए प्रस्तावित योजनाएं हैं। इनके तहत 31.24 करोड़ की विभिन्न योजनाएं शामिल हैं। पिछले दिनों बाढ़ नियंत्रण पर्षद की 57वीं बैठक में इन योजनाओं को स्वीकृति दी गयी है।


नेपाल प्रक्षेत्र में बाढ़ पूर्व की सारी योजनाएं केन्द्र सरकार की सहायता से होती है। रिवर मैनेजमेंट एक्टिविटीज एंड वर्क्स रिलेटेड टू बाॅर्डर एरिया (आरएमएडब्ल्यूबीए) के तहत संचालित योजनाओं का पूरा खर्च केन्द्र ही देता है। केन्द्र सरकार बिहार की अन्य बाढ़ योजनाओं में 50 फीसदी की सहायता राशि देता है लेकिन आरएमएडब्ल्यूबीए के तहत 100 फीसदी राशि केन्द्र सरकार देती है। हालांकि योजनाओं के चयन का अधिकार बिहार के पास होता है। ये योजनाएं नेपाल से आने वाली नदियों के प्रवाह पर अंकुश लगाना है ताकि वे उत्तर बिहार में तबाही म फैलाएं।